रीदाबाद, (news24x365) फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, फरीदाबाद ने दुर्लभ ब्लड कैंसर मल्टीपल मायलोमा से पीड़ित 69 वर्षीय मरीज का सफलतापूर्वक बोन मैरो ट्रांसप्लांट (अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण) कर उन्हें नई जिंदगी दी है। मरीज की हालत अस्पताल पहुंचने के समय बेहद गंभीर थी, लेकिन डॉक्टरों की टीम की सावधानीपूर्वक रणनीति और आधुनिक उपचार से उनकी स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

अस्पताल के अनुसार, मरीज को हड्डियों में तेज दर्द, बार-बार त्वचा और हड्डियों में संक्रमण तथा चलने-फिरने में गंभीर परेशानी थी, जिसके कारण वह व्हीलचेयर पर निर्भर हो गए थे। विस्तृत जांच और बोन मैरो परीक्षण के बाद उन्हें मल्टीपल मायलोमा नामक गंभीर ब्लड कैंसर होने की पुष्टि हुई।

मरीज की अधिक उम्र और कमजोर स्वास्थ्य को देखते हुए डॉक्टरों ने पारंपरिक कीमोथेरेपी की बजाय टार्गेटेड थेरेपी अपनाई, जिससे उनकी हालत में सुधार होने लगा। इसके बाद डॉक्टरों ने सफलतापूर्वक बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया, जिसे मल्टीपल मायलोमा के योग्य मरीजों के लिए मानक उपचार माना जाता है। इलाज के बाद मरीज की रिकवरी तेजी से हुई और अब वह व्हीलचेयर पर निर्भर नहीं हैं।

इस सफल उपचार का नेतृत्व डॉ. सिद्धार्थ शंकर सूद, सीनियर कंसल्टेंट, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, फरीदाबाद ने किया। उन्होंने बताया कि मल्टीपल मायलोमा एक जटिल और आजीवन रहने वाला ब्लड कैंसर है, जिसमें समय-समय पर मेडिकल सहायता की जरूरत पड़ती है। मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए पहले उनकी हालत स्थिर की गई और फिर लक्षित दवाओं से रोग को नियंत्रित कर बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया गया।

डॉ. सूद ने कहा कि मरीज की अधिक उम्र के बावजूद उनकी मानसिक मजबूती और सकारात्मक सोच ने उपचार को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई। ट्रांसप्लांट के बाद उनकी रिकवरी उत्साहजनक रही है और लंबे समय तक बेहतर जीवन की संभावनाएं बढ़ी हैं।

वहीं, डॉ. अभिषेक शर्मा, फेसिलिटी डायरेक्टर, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, फरीदाबाद ने कहा कि करीब 70 वर्ष के कमजोर मरीज का सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट अस्पताल की विशेषज्ञ टीम, एडवांस इंफ्रास्ट्रक्चर और स्पेशलाइज्ड ट्रांसप्लांट सपोर्ट का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि अस्पताल का उद्देश्य हर उम्र के मरीजों को अत्याधुनिक कैंसर उपचार उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें बेहतर जीवन गुणवत्ता मिल सके।

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