शेखर दास की रिपोर्ट 

फरीदाबाद।(news24x365) फरीदाबाद के बीके सिविल अस्पताल में 25 जून को हुई एक घटना ने एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक परिवार ने आरोप लगाया है कि उनके महज दो दिन के नवजात बच्चे को इलाज देने के बजाय अस्पताल से रेफर कर दिया गया, जिसके चलते उन्हें रोहतक से लेकर फरीदाबाद तक भटकना पड़ा।

परिजनों के अनुसार, साबिर अपने दो दिन के नवजात बच्चे को गंभीर हालत में इलाज के लिए बीके अस्पताल लेकर पहुंचे थे। उनका आरोप है कि अस्पताल में बच्चे का समुचित उपचार करने के बजाय उन्हें अन्य अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। परिजनों का कहना है कि बच्चे की हालत को देखते हुए उन्हें तत्काल इलाज की उम्मीद थी, लेकिन उन्हें केवल रेफर का विकल्प दिया गया।

परिजनों ने यह भी दावा किया कि अस्पताल की ओर से उन्हें एक मोबाइल नंबर दिया गया। उनका कहना है कि बाद में जानकारी लेने पर पता चला कि वह नंबर किसी अन्य अस्पताल से जुड़ा हुआ था। इसको लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कई बार गंभीर मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए उच्च स्तरीय अस्पतालों में रेफर करना चिकित्सा प्रक्रिया का हिस्सा होता है। यदि किसी अस्पताल में आवश्यक उपकरण, विशेषज्ञ चिकित्सक या नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) उपलब्ध नहीं है, तो मरीज को रेफर किया जा सकता है।

वहीं, स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकारी अस्पतालों में संसाधनों और सुविधाओं की कमी के कारण मरीजों को अक्सर रेफर किया जाता है, जिससे उन्हें अतिरिक्त आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि ऐसे मामलों में निजी अस्पतालों के प्रतिनिधि या एजेंट भी सक्रिय हो जाते हैं और परेशान परिवारों से संपर्क साधते हैं।

फिलहाल इस मामले में बीके सिविल अस्पताल प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। अस्पताल प्रबंधन की प्रतिक्रिया आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नवजात को रेफर करने के पीछे क्या कारण थे और क्या अस्पताल में उसके इलाज की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध थी।

यह घटना एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारियों, संसाधनों और रेफरल व्यवस्था को लेकर बहस छेड़ रही है। सवाल यह है कि गंभीर मरीजों और नवजात बच्चों को समय पर उपचार सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग क्या कदम उठाएगा।

(नोट: इस समाचार में परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों को उनके दावों के आधार पर प्रकाशित किया गया है। अस्पताल प्रशासन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

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