शेखर दास की रिपोर्ट
फरीदाबाद, (news24x365) इन्वर्टेड हैंड (बाइलेटरल रेडियल क्लब हैंड) जैसी अत्यंत दुर्लभ जन्मजात विकृति से पीड़ित एक वर्षीय बच्ची को फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, फरीदाबाद में नई जिंदगी मिली है। यह कंडीशन इतनी दुर्लभ होती है कि दुनियाभर में प्रति दो लाख जन्मों में केवल एक शिशु ही इससे प्रभावित होता है।
जन्म के समय बच्ची के दोनों हाथ टेढ़े-मेढ़े थे और दोनों हथेलियों में अंगूठे मौजूद नहीं थे। समय पर उपचार न मिलने की स्थिति में यह विकृति स्थायी विकलांगता का कारण बन सकती थी। इस जटिल स्थिति को देखते हुए फोर्टिस फरीदाबाद की विशेषज्ञ टीम ने एडवांस पिडियाट्रिक सर्जरी के जरिए बच्ची का सफल उपचार किया।
डॉ. मनीष नंदा, एडिशनल डायरेक्टर, प्लास्टिक सर्जरी, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, फरीदाबाद के नेतृत्व में मल्टीडिसीप्लीनरी टीम ने एक माह की अवधि में टू-स्टेज करेक्टिव सर्जरी को अंजाम दिया। पहले चरण में विशेष बाहरी डिवाइस की मदद से कलाई के आसपास की कठोर त्वचा और ऊतकों को धीरे-धीरे फैलाया गया। दूसरे चरण में फोरआर्म की हड्डी को कलाई के केंद्र तक लाकर हाथों को सीधा और स्थिर किया गया।
इस सर्जरी को और भी चुनौतीपूर्ण बना देने वाला तथ्य यह था कि बच्ची को जन्मजात हृदय संबंधी समस्या भी थी, जिससे ऑपरेशन का जोखिम काफी बढ़ गया था। इसके बावजूद डॉक्टरों की टीम ने अत्यंत सावधानी और सटीकता के साथ दोनों हाथों की सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा किया।
डॉ. मनीष नंदा ने बताया कि यदि समय रहते सर्जरी न की जाती, तो बच्ची को जीवनभर शारीरिक सीमाओं और कार्यात्मक समस्याओं का सामना करना पड़ता। समय पर हस्तक्षेप से न केवल हाथों की कार्यप्रणाली बहाल हुई, बल्कि बच्ची की भविष्य की जीवन गुणवत्ता भी सुनिश्चित हो सकी।
बच्ची की मां ने डॉक्टरों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शुरुआत में यह स्थिति उनके लिए बेहद डरावनी थी, लेकिन अब अपनी बेटी के हाथों को सामान्य रूप से विकसित होते देखना किसी चमत्कार से कम नहीं है।
फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, फरीदाबाद के फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ. अभिषेक शर्मा ने कहा कि यह केस अस्पताल की उन्नत पिडियाट्रिक सर्जिकल क्षमताओं और टीमवर्क का प्रमाण है। समय पर और सटीक उपचार से दुर्लभ जन्मजात विकृतियों से पीड़ित बच्चों को भी सामान्य जीवन का अवसर मिल सकता है।
