शेखर दास की रिपोर्ट
फरीदाबाद, (news24x365) फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, फरीदाबाद के डॉक्टरों ने गंभीर एओर्टिक स्टेनॉसिस से पीड़ित दो बुजुर्ग एवं अत्यंत जोखिमग्रस्त हृदय रोगियों का ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व इंप्लांटेशन (TAVI) प्रक्रिया के माध्यम से सफल उपचार किया है। यह प्रक्रिया ओपन-हार्ट सर्जरी का एक आधुनिक और सुरक्षित विकल्प मानी जाती है।
इन जटिल प्रक्रियाओं को डॉ. संजय कुमार, सीनियर डायरेक्टर – कार्डियोलॉजी के नेतृत्व में फोर्टिस की मल्टीडिसीप्लीनरी कार्डियोलॉजी टीम ने अत्यंत सावधानीपूर्वक अंजाम दिया।
उच्च जोखिम के चलते ओपन हार्ट सर्जरी संभव नहीं थी
इलाज किए गए मरीजों में एक 86 वर्षीय पुरुष और एक 79 वर्षीय महिला शामिल हैं। दोनों की अधिक उम्र और पहले से मौजूद कई गंभीर बीमारियों के कारण पारंपरिक एओर्टिक वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी संभव नहीं थी। दोनों मरीज सीओपीडी, डायबिटीज, हाइपरटेंशन और कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़ से पीड़ित थे तथा पहले से उनके हृदय में स्टेंट भी लगे हुए थे।
मरीजों को सांस फूलना, चक्कर आना और अत्यधिक थकान जैसी समस्याओं के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिससे उनकी जीवन गुणवत्ता बुरी तरह प्रभावित हो चुकी थी।
मृत्यु जोखिम अधिक, TAVI बना जीवनरक्षक विकल्प
2डी इकोकार्डियोग्राफी जांच में दोनों मरीजों में गंभीर एओर्टिक स्टेनॉसिस की पुष्टि हुई। आंकड़ों के अनुसार, 86 वर्षीय मरीज में मृत्यु का जोखिम 15.8 प्रतिशत और 79 वर्षीय महिला मरीज में 12.1 प्रतिशत आंका गया, जिससे ओपन हार्ट सर्जरी अत्यंत जोखिमपूर्ण हो सकती थी।
विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर इलाज न मिलने की स्थिति में इन मरीजों की जीवन प्रत्याशा केवल 2 से 3 वर्ष रह जाती।
बिना छाती खोले सफल उपचार
उच्च जोखिम को देखते हुए डॉक्टरों ने मिनीमली इनवेसिव TAVI प्रक्रिया को चुना, जिसमें बिना छाती खोले रोगग्रस्त एओर्टिक वाल्व को बदला जाता है। दोनों ही मरीजों की सर्जरी कॉन्शस सेडेशन में की गई, ताकि एनेस्थीसिया से जुड़े जोखिम को न्यूनतम रखा जा सके।
86 वर्षीय मरीज की प्रक्रिया लगभग 2.5 घंटे, जबकि 79 वर्षीय महिला मरीज की प्रक्रिया करीब 3 घंटे में सफलतापूर्वक पूरी की गई। सर्जरी के बाद दोनों मरीजों की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ और स्थिर अवस्था में उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
विशेषज्ञों की राय
डॉ. संजय कुमार ने कहा,
“गंभीर एओर्टिक स्टेनॉसिस बुजुर्ग और पहले से बीमार मरीजों में बड़ी चुनौती होती है। लगभग 8–9 प्रतिशत बुजुर्ग आबादी इससे प्रभावित है। टीएवीआई उन मरीजों के लिए जीवनरक्षक विकल्प है, जिनमें पारंपरिक सर्जरी संभव नहीं होती। इन सफल मामलों ने यह साबित किया है कि एडवांस टेक्नोलॉजी और सही मरीज चयन से हाइ-रिस्क मरीजों में भी बेहतर नतीजे हासिल किए जा सकते हैं।”
वहीं डॉ. अभिषेक शर्मा, फैसिलिटी डायरेक्टर, ने कहा,
“इन जटिल मामलों की सफलता ने एक बार फिर यह साबित किया है कि फोर्टिस एस्कॉर्ट्स फरीदाबाद के पास उन्नत कार्डियक केयर इंफ्रास्ट्रक्चर और अनुभवी चिकित्सकीय टीम मौजूद है। हम बुजुर्ग और हाई-रिस्क मरीजों को सुरक्षित, आधुनिक और विश्वस्तरीय उपचार उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
