रीदाबाद, (news24x365) अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद ने एक अत्यंत दुर्लभ और जीवन-घातक जन्मजात स्थिति से जूझ रहे पाँच नवजात शिशुओं को सफलतापूर्वक उपचार कर जीवनदान दिया है। इन बच्चों का जन्म ऐसे हुआ था कि उनका जिगर, किडनियाँ, आंतें और पेट का हिस्सा छाती की गुहा में मौजूद थे, जिससे उनके फेफड़ों को विकसित होने का पर्याप्त स्थान नहीं मिल पाया। इस स्थिति को कंजेनिटल डायफ्रामेटिक हर्निया (CDH) कहा जाता है और यह हर 5,000 जन्मों में लगभग एक बार देखने को मिलती है। पिछले तीन महीनों में किए गए इन मामलों में सर्जरी और गहन नवजात देखभाल की लंबी प्रक्रिया शामिल रही, जिसके बाद पाँचों शिशु अब स्वस्थ हैं और अपने परिवारों के साथ घर लौट चुके हैं।

इनमें से चार मामलों में हर्निया बाईं ओर था, जहाँ उपचार की जटिलता अपेक्षाकृत नियंत्रित रही, जबकि एक मामला दाईं ओर का था, जो शिशु शल्य-चिकित्सा में सबसे कठिन श्रेणी में आता है। इस गंभीर मामले में बच्चे का जिगर लगभग पूरी तरह छाती में खिसक गया था और फेफड़ों का विकास अत्यंत सीमित रह गया था। जन्म के तुरंत बाद बच्चे को गंभीर श्वसन संकट में वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने अत्यंत सटीकता के साथ जिगर और आंतों को उनकी प्राकृतिक स्थिति में वापस स्थापित किया और डायफ्राम का पुनर्निर्माण स्थानीय ऊतकों की मदद से किया। सर्जरी के बाद की स्थिति भी उतनी ही चुनौतीपूर्ण रही, जहाँ नवजात को लंबे समय तक उच्च स्तरीय वेंटिलेशन, नियंत्रित दवाओं, पोषण प्रबंधन और निरंतर निगरानी की आवश्यकता पड़ी।

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